Helpless hunger, mourning faces is the everyday feature at the tribal settlement of Satpuda wilderness, where the devil of malnutrition has eaten thousands of infants. Even before they are able to stand on their feet, …
Read the full story »
सच कहूँ तो प्यार हो गया था मुझे उन दिनों| एक अजीब सी बेचैनी रहती थी| मुशिकिल था मेरे लिए भुलाना उन आँखों को जिनकी खामोशी अचानक मनमोहक हो गयी थी| बस बिडम्बना यह है की उन्हें फिर कभी नहीं देख पाया| (जो मित्र मेरा लेख पहली बार पढ़ रहे हों, वो मेरा पिछला लेख “अब लिपस्टिक ही पोतेगी या कस्टमर भी देखेगी…? ” पहले पढ़ लें, इसे समझने में आसानी होगी)|
अरुणा और बाकि लड़कियों के साथ कुछ दिन तक रहे हम| उनकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के कई पहलू देखने को मिले| एक दिन तो अरुणा को घुमाने के लिए इंडिया गेट भी लेकर गए| कितनी खुश थी वह, जब तक हम इंडिया गेट पर रहे वह बस अपने बेटे के साथ ही खेलती रही| संध्या और अरुणा काफी अच्छी दोस्त बन गयी थी| और क्यों नहीं अगर संध्या को अपनी फिल्म अपने तरीके से पूरी करनी थी तो कुछ छुपी बातों को जानने के लिए पहले उनसे अच्छी दोस्ती होना ज़रूरी था|
हाँ मैं बात कर रहा था अपने प्यार की|बस अभी उसी और बढ़ रहे हैं| हमारे लिए अभी कुछ और पहलुओं को जानना भी बाकि था|उनमें से एक था मुजरा| भारतीय फिल्मों में हमने काफी देखा था पर असलियत में क्या वह वैसा ही होता है या नहीं ऐसे कई सवाल अभी भी हमारे ज़हन में घूम रहे थे| मुझे कुछ इस तरह का महसूस हो रहा था जैसे की हम वहां जायेंगे और सीढियों से ऊपर चढ़ते हुए धीमी आवाज़ में संगीत सुनाई देगा| फिर वो आवाज़ बढ़ती जायेगी और हम एक

बड़े से महल में पहुंचेंगे जहाँ संगीत की महफ़िल सजी होगी| पर अफ़सोस, मैं एक फिल्मकार होने के बाबजूद भी उन करोडों भारतीयों की तरह सोच रहा था जो अपने घर में बैठे हमारी फिल्मों में दिखाई देने वाले मुजरे को ही सच समझ बैठे हैं| आखिर सभी फिल्में सच नहीं दिखाती|मेरे कदम ज्यों ही सीढियों पर पढ़े तो मुझे फिसल जाने का डर सता रहा था| इतना अँधेरा था वहां पर कि बस मैं और संध्या एक दुसरे की आवाज़ ही सुन पा रहे थे| ऊपर की ओर देखते हुए, दूर कहीं थोडी सी रोशनी दिखाई दे रही थी| अचानक मेरा हाथ एक रस्सी पर पढ़ा तो समझ आया की ऊपर तक पहुँचने के लिए यहाँ रस्सी का सहारा मौजूद है| और फिर हम किसी तरह से बचते-बचाते उन सीढियों से ऊपर चढ़ गए|
एक कोने में कुछ लड़कियाँ बैठी हुई ताश खेल रही थी और बहुत खुश नज़र आ रही थी|यहाँ भी एक अम्मा जी थी जो पान चबा रही थी| उन्होंने हमें बुलाया और पूछा कि आप वही हो जिनके बारे में NGO वालों ने बताया था? संध्या नें अपनी ही हिंदी में कहा ” हाँजी हम वही हैं (कुछ उसी तरह जैसे सोनिया गाँधी बोलती हैं)|” अम्मा जी नें बबलू को आवाज़ दी और कहा बिछाने के लिए कुछ लेकर आ, मैडम जी आई हैं, अमेरिका से (उन्हें नहीं पता की अमेरिका और इंग्लैंड में कुछ अलग है)| और कहा की मास्टर जी को भी बोल दो की वो लोग आ गए हैं तो थोड़ी देर में आ जाए| मेरी नज़रें अभी भी उस जगह को ढूंढ रही थी जहाँ पर मुजरा होता है| क्योंकि यहाँ तो सब वैसा ही नज़र आ रहा था जैसा हम पिछले कुछ दिनों से देखते आ रहे थे| बस वो छोटे छोटे कमरे यहाँ नहीं थे, जिससे यहाँ कुछ तो अलग होने के आसार नज़र आ रहे थे| तब मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी जो मेरी बाईं तरफ चुप-चाप बैठी थी| वो बहुत खुबसूरत थी खासकर उसकी आँखें| ऐशवर्या राय की आँखों सेभी ज्यादा खूबसूरत| वैसे तो मैं कभी लड़कियों के नाम नहीं भूलता और वो भी जब वो खूबसूरत हों, पर न जाने क्यों आज भी मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा| उसके नयन बड़े कज़रारे थे तो मैं उसको कज़री का नाम दे रहा हूँ| कज़री….| बस पहली ही नज़र में मुझे वो भा गयी थी| रोज़ न जाने यहाँ कितनी ही लड़कियों को देखा था, एक से बढ़कर एक खूबसूरत, पर कभी इस तरह से कुछ सोचा नहीं था| पर कज़री की आँखों नें तो लग रहा था बस लूट लिया मुझे…मदहोश हो गया था मैं| मैं उसे देख ही रहा था की संध्या नें मुझे बगल से कन्धा मारा….stop staring at her (उसे घूरना बंद करो)| अम्मा जी ने उसे बोला की तैयार हो जाओ मास्टर जी आते ही होंगे| और वो सामने एक छोटे से पर्दे के पीछे तैयार होने चली गयी|
अम्मा जी से बात करते हुए पता चला की मुजरा इसी जगह होता है जहाँ हम बैठे थे| वो भी पहले तो हस पड़ी और बोली, “अरे यहाँ जो पहली बार आता है

ना…वो तुम्हारे जैसा फिल्मो वाला मुजरा ही सोचता है| पर हम यहीं पर अभी थोडी देर में ज़मीं पर दरी बिछायेंगे और बस आस पास कुछ पर्दे लगा देंगे और शुरू हो जायेगा| अभी मास्टर जी भी आते ही होंगे”| पर सबसे अच्छी बात जो अम्मा जी से पता चली वो थी वैश्यावृति को लेकर| उनका कहना था, “हमारे यहाँ केवल नाच होता है बाकि सब के लिए यहाँ इतनी सारी जगहें है ना! जिसका जो मन करे वो करे…पर यहाँ नहीं, हमारी लड़कियाँ बस नाचती हैं, जिसे नाच देखना हो वो रुके नहीं तो हम किसी को नहीं रोकते|” बस यूं ही वक़्त बीतता जा रहा था| कुछ देर में मास्टर जी भी आ गए और कज़री भी तैयार हो चुकी थी| तब हमें पता चला की आज कोई भी मुजरा देखने नहीं आएगा, क्योंकि हम कैमरा लेकर जो आये हैं साथ में| संध्या बहुत दुखी थी क्योंकि वो तो एक अच्छा वाला मुजरा फिल्माना चाहती थी| खैर अब कज़री भी तैयार थी और सारी तैयारियां भी हो चुकि थी| मास्टर जी तैयार बैठे थे बस अब कज़री के बाहर आने का इंतज़ार था| ज्यों ही पर्दा हटा और कज़री एक हरे रंग का लेहंगा पहन कर बाहर आई|उसने चहरे पर पर्दा किया हुआ था| उसके घुँघरू की झंकार मेरे दिल में उतर रही थी| मैं और संध्या बीच में बैठे हुए थे क्योंकि हम आज की रात मेहमान थे उनके| संध्या नें मुझे बीच में बिठा दिया और बोली...”shez gonna dance for u tonight so enjoy (वो आज की रात तुम्हारे लिए नाचेगी तो फिर मजा लो)|”
“दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिये, बस एकबार मेरा कहा मान लीजिये”….और फिर कज़री नें पर्दा उठाया…क्या आँखें थी वो| अभी भी बस वैसी ही सुन्दर मुझे नज़र आ रही हैं| कभी नहीं भूल पाउँगा मैं कज़री को……..सच में मुझे प्यार हो गया था उससे|
दिल्ली के जी. बी. रोड का नाम आते ही लोगों की आंखे खुली की खुली रह जाती हैं| इसलिए नहीं कि वहाँ थोक विक्रेताओं का एक बड़ा पुराना बाज़ार है बल्कि इसलिए कि वहाँ जिस्म …
The conditions of govt. primary schools in Melghat, Amravati district of Maharashtra. Well this is the same in other parts of India.
When a student from the lowest strata of society fights against all odds to prove her merit and reach the best educational institutions in India, are those institutions proving themselves meritorious enough to recognize her …
आज़ादी के बाद के सबसे बड़े कहे जाने वाले अब्दोलन को लेकर लोगों में काफी चिंतन हो रहा है| बहुत सारे मित्र चाहे वो फेसबुक में हो या फिर देश के अलग-अलग शहरों …
150 stakeholders and 16 experts come together to discuss critical challenges facing Indian Education System at the School Choice National Conference 2010.
[I’m sharing this peice with all fo you but I myself is not happy …
It took a long time for me to complete the film. I know many people are waiting for long long time to watch this film. Due to some financial problems the film could not be …